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राष्ट्रपति भवन की मेहमान बनीं सीकर की संतोष देवी, संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एट होम’ समारोह में शामिल होना हर नागरिक के लिए सम्मान की बात होती है। इस खास मौके पर देशभर से चुनिंदा लोगों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें राजस्थान के सीकर जिले की महिला किसान संतोष देवी खेदड़ भी शामिल रहीं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने वाली संतोष देवी की कहानी मेहनत, साहस और नवाचार की मिसाल बन चुकी है।

सीकर जिले के लिए गर्व का क्षण

राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की रहने वाली संतोष देवी खेदड़ को उनकी उन्नत और शोध आधारित खेती के लिए इस समारोह में आमंत्रित किया गया। राष्ट्रपति भवन में उनकी मौजूदगी न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले और राज्य के लिए गर्व की बात रही। यह सम्मान उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक बागवानी और रिसर्च आधारित कृषि मॉडल अपनाने के लिए मिला है।

भैंस बेचकर की खेती की शुरुआत

संतोष देवी की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। वर्ष 2008 में उन्होंने महज 5 बीघा जमीन से बागवानी खेती की शुरुआत की थी। उस समय उनके पास न तो पर्याप्त पूंजी थी और न ही आधुनिक संसाधन। अनार की खेती शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी एकमात्र भैंस तक बेच दी। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई व्यवस्था खड़ी करने के लिए उन्हें उधार भी लेना पड़ा। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन संतोष देवी का आत्मविश्वास और मेहनत उनके साथ थी।

रेतीले इलाकों में सेब और अनार की रिसर्च

संतोष देवी की खास पहचान उनकी उस रिसर्च से बनी, जिसमें उन्होंने राजस्थान जैसे रेतीले और कठिन इलाकों में सेब और अनार की उन्नत बागवानी को सफल करके दिखाया। आमतौर पर इन फसलों को ठंडे और उपजाऊ क्षेत्रों से जोड़ा जाता है, लेकिन संतोष देवी ने आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में भी नई संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।

सीमित संसाधनों में बड़ी सफलता

अपनी रिसर्च और प्रयोगों के आधार पर आज संतोष देवी फलों के पौधों की नर्सरी भी संचालित कर रही हैं। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के जरिए वे सालाना करीब 40 लाख रुपये की कमाई कर रही हैं। उनकी खेती न केवल आर्थिक रूप से सफल है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आसपास के कई किसान अब उनके मॉडल को अपनाकर बागवानी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

संस्थानों का मिला सहयोग

संतोष देवी की इस सफलता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), अटारी (ATARI) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) फतेहपुर की भूमिका भी अहम रही है। इन संस्थानों ने उन्हें आधुनिक खेती के तरीकों से परिचित कराया और नई तकनीकों पर प्रयोग करने में सहयोग दिया। सिलेक्शन प्रक्रिया के दौरान भी इन संस्थाओं ने संतोष देवी की मेहनत और नवाचार को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया।

शिक्षा से नहीं, हौसले से बनती है पहचान

पांचवीं कक्षा तक पढ़ी-लिखी संतोष देवी खेदड़ ने यह साबित कर दिया कि सीमित औपचारिक शिक्षा भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनती। उनका आत्मविश्वास, सीखने की ललक और मेहनत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने दिखा दिया कि अगर सोच नई हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है।

सम्मान पर क्या बोलीं संतोष देवी

राष्ट्रपति भवन में आमंत्रण मिलने पर संतोष देवी ने राष्ट्रपति और आयोजकों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि देश के उन सभी प्रगतिशील किसानों की पहचान है, जो नई तकनीक और नवाचार के जरिए खेती को आगे बढ़ा रहे हैं। संतोष देवी की यह कहानी आज हजारों किसानों, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।