16 जनवरी 2026: चांदी में बड़ी गिरावट, बाजार खुलते ही ₹6,000 तक लुढ़की कीमत, सोना भी हुआ सस्ता
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को कमोडिटी बाजार में चांदी की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बाजार खुलते ही चांदी धड़ाम हो गई। 5 मार्च डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 2,91,577 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी, लेकिन आज यह सीधे 2,87,127 रुपये प्रति किलो पर खुली। यानी ओपनिंग के साथ ही करीब 4,450 रुपये की कमजोरी देखने को मिली, जो कुछ ही देर में और बढ़ गई।
इंट्राडे में चांदी ने बनाया निचला स्तर
शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी की कीमत और फिसल गई। कारोबार के दौरान यह 2,85,513 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर तक पहुंच गई, जबकि ऊपरी स्तर पर 2,88,901 रुपये प्रति किलो तक गई। सुबह करीब 9.45 बजे चांदी 3,449 रुपये यानी करीब 1.18 फीसदी की गिरावट के साथ 2,88,128 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी गिरावट से निवेशकों में हलचल देखी गई।
सोने की कीमत में भी दिखी नरमी
चांदी के साथ-साथ आज सोने की कीमत में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। MCX पर 5 फरवरी डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,43,121 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। आज यह गिरावट के साथ 1,42,589 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में सोना 1,42,400 रुपये तक नीचे गया, जबकि दिन का उच्च स्तर 1,42,837 रुपये रहा। सुबह करीब 10 बजे सोना 350 रुपये यानी 0.24 फीसदी की गिरावट के साथ 1,42,771 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
लंबी अवधि में अब भी मजबूत है रुझान
हालांकि आज की गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया है, लेकिन लंबी अवधि के आंकड़े अब भी मजबूत रुझान की ओर इशारा करते हैं। साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब 5 फीसदी और चांदी की कीमत में लगभग 15 फीसदी की तेजी दर्ज की जा चुकी है। अगर पिछले एक साल का आंकड़ा देखा जाए तो सोने की कीमत में करीब 80 फीसदी की बढ़त हुई है, जबकि चांदी ने करीब 192 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है।
कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसी कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा कई देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में लंबी अवधि में मजबूती बनी हुई है, भले ही अल्पकाल में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो।