जयपुर बना ऐतिहासिक गवाह: जयपुर में पहली बार आम जनता के बीच भारतीय सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन
गुलाबी नगरी जयपुर के लिए आज की सुबह ऐतिहासिक बन गई, जब भारतीय सेना के 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर पहली बार सेना दिवस परेड किसी सैन्य छावनी की सीमाओं से बाहर आयोजित की गई। गुरुवार सुबह 10 बजे जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित इस भव्य परेड ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह आयोजन भारतीय सेना की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें वह आम नागरिकों से सीधे जुड़कर अपनी ताकत, तकनीक और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करना चाहती है।
15 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। यह दिन भारतीय सेना की स्वतंत्र पहचान और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है। जयपुर में आयोजित यह परेड उस गौरवशाली विरासत और आधुनिक सैन्य भविष्य का सशक्त संगम बनी।
‘भैरव बटालियन’ बनी परेड का केंद्र
इस बार की परेड का सबसे बड़ा आकर्षण ‘भैरव बटालियन’ रही, जिसने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए गठित यह यूनिट पैरा स्पेशल फोर्सेस और नियमित इंफेंट्री के बीच सेतु का काम करती है। ड्रोन आधारित युद्ध, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और दुर्गम इलाकों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित यह बटालियन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिले अनुभवों का परिणाम मानी जा रही है।
मिसाइल और रॉकेट सिस्टम की ताकत
परेड में भारतीय सेना की मारक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, जिसकी मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर मानी जाती है, ने भारत की स्ट्राइक क्षमता को रेखांकित किया। इसके साथ ही पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम, जो 120 किलोमीटर तक सटीक हमला कर सकता है, और SMERCH व BM-21 ग्राड जैसे मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर भी प्रदर्शित किए गए।
एयर डिफेंस और ड्रोन वॉरफेयर की झलक
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एयर डिफेंस की भूमिका को दर्शाते हुए ‘आकाशतीर’ स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को भी परेड में शामिल किया गया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस प्रणाली ने विदेशी ड्रोन को निष्क्रिय कर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। इसके साथ ही कामिकाजे ड्रोन जैसे मिनी हार्पी, हारोप और स्काई स्ट्राइकर ने भविष्य के युद्ध की तस्वीर पेश की। MUM-T तकनीक के माध्यम से सैनिकों और मानवरहित वाहनों के तालमेल का प्रदर्शन भी पहली बार किया गया।
बख्तरबंद शक्ति और हवाई प्रदर्शन
सेना के आधुनिक हेलीकॉप्टर अपाचे AH-64E और स्वदेशी प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ने आकाश में शानदार करतब दिखाए। वहीं, भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक T-90 ‘भीष्म’ अपनी ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता के साथ परेड का हिस्सा बना।
भविष्य की सेना और वीरों का सम्मान
परेड में रोबोटिक डॉग्स और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स जैसे सैपर स्काउट और ऐरावत-1000 को भी शामिल किया गया, जो भविष्य के युद्ध में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे पहले बुधवार शाम जयपुर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित इन्वेस्टिचर सेरेमनी में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वीरता पुरस्कार प्रदान किए। ऑपरेशन सिंदूर में असाधारण साहस दिखाने वाली 26 यूनिट्स को विशेष सम्मान देकर सेना की परंपरा और गौरव को और मजबूत किया गया।