राजस्थान में पंचायत चुनाव के खर्च की सीमा बढ़ी, जानें सरपंच से लेकर पार्षद तक कितनी तय हुई लिमिट
राजस्थान में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने सरपंच, पंचायत समिति, जिला परिषद और नगरीय निकाय चुनावों में प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है। यह फैसला मौजूदा समय में बढ़ते चुनावी खर्च और प्रचार के बदलते तरीकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्याशी पहले के मुकाबले दोगुनी या उससे अधिक राशि तक चुनाव प्रचार पर खर्च कर सकेंगे।
सरपंच पद के लिए खर्च सीमा हुई दोगुनी
राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित आदेश के अनुसार अब सरपंच पद के उम्मीदवार एक लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर सकेंगे। इससे पहले यह सीमा 50 हजार रुपए तय थी। आयोग का मानना है कि मौजूदा समय में प्रचार सामग्री, वाहन, सभाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को देखते हुए पुरानी सीमा व्यावहारिक नहीं रह गई थी। नई सीमा से उम्मीदवारों को अपने प्रचार अभियान को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भी इजाफा
सरपंच के साथ-साथ जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के लिए भी खर्च सीमा बढ़ाई गई है। बीते वर्षों की तुलना करें तो वर्ष 2014 में जिला परिषद के उम्मीदवार अधिकतम 80 हजार रुपए तक ही खर्च कर सकते थे। अब यह सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दी गई है। इसी तरह पंचायत समिति सदस्यों के लिए भी खर्च की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी की गई है, ताकि प्रत्याशी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से प्रचार कर सकें।
नगरीय निकाय चुनावों में कितनी तय हुई सीमा
नगरीय निकाय चुनावों में भी खर्च सीमा में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। नगर निगम पार्षद पद के लिए वर्ष 2014 में जहां अधिकतम खर्च सीमा 80 हजार रुपए थी, उसे 2019 में बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए किया गया था। अब इसे और बढ़ाकर 3.5 लाख रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा नगर परिषद चुनावों में प्रत्याशी 2 लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे, जबकि नगर पालिका चुनावों के लिए यह सीमा 1.5 लाख रुपए तय की गई है।
क्यों जरूरी था खर्च सीमा बढ़ाना
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि समय-समय पर चुनावी खर्च की सीमा में संशोधन करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि प्रचार के साधन, सामग्री और व्यवस्थाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुरानी सीमा में रहकर निष्पक्ष और प्रभावी चुनाव प्रचार कर पाना कठिन हो गया था। नई सीमा से चुनाव प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनेगी।
2026 तक पूरे हो सकते हैं पंचायत और निकाय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने जानकारी दी कि आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के 15 अप्रैल 2026 तक पूरे होने की संभावना है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए चुने गए सरपंचों और प्रतिनिधियों को 16वें वित्त आयोग के तहत नया बजट आवंटन किया जाएगा। इससे पंचायतों और निकायों के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
नियमों के पालन पर रहेगी सख्ती
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि खर्च सीमा बढ़ाने के साथ-साथ नियमों के पालन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। सभी उम्मीदवारों को तय की गई अधिकतम सीमा के भीतर ही खर्च करना होगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि खर्च सीमा का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमबद्ध बनाए रखना है।
चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने की कोशिश
आयोग का मानना है कि खर्च सीमा में वृद्धि से प्रत्याशी अपने चुनावी अभियान को बेहतर ढंग से संचालित कर पाएंगे। इससे प्रचार व्यवस्था सुधरेगी और चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी करने में भी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यह फैसला पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को अधिक व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।