खर्राटे: सामान्य समस्या या गंभीर बीमारी का संकेत? जानिए कारण और बचाव के उपाय
हममें से कई लोगों को सोते समय खर्राटे लेने की समस्या होती है। गहरी नींद में यह अनजाने में शुरू हो जाती है और अक्सर व्यक्ति को खुद इसका एहसास भी नहीं होता। हालांकि देखने में यह एक आम और हल्की समस्या लगती है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि लगातार और तेज़ खर्राटे कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं। खासकर लंबे समय से खर्राटों से परेशान लोगों को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खर्राटों का असर सिर्फ व्यक्ति की सेहत पर ही नहीं, बल्कि उसके साथ सो रहे लोगों की नींद और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ सकती है।
खर्राटे क्यों आते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार खर्राटे तब आते हैं, जब सोते समय सांस लेने का रास्ता आंशिक रूप से बंद हो जाता है। थकान, मोटापा, सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना, गले में बलगम और एलर्जी जैसी समस्याएं इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। सर्दियों के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि ठंड के कारण नाक बंद होना और गले में खराश आम बात है। आंकड़ों के अनुसार 18 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 45 प्रतिशत लोग कभी न कभी खर्राटों की समस्या से जूझते हैं।
कब हो सकता है खतरे का संकेत
अगर खर्राटे रोज़ाना आते हैं, बहुत तेज़ होते हैं या इनके साथ सांस रुकने, सुबह सिरदर्द, दिन में अत्यधिक नींद और थकान जैसी समस्याएं जुड़ी हों, तो यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि समय रहते इलाज न होने पर यह समस्या हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है।
सोने की आदतों का रखें ध्यान
खर्राटों को कम करने के लिए सबसे पहले अपनी सोने की आदतों में सुधार करना जरूरी है। पीठ के बल सोने से जीभ और तालू पीछे की ओर खिसक सकते हैं, जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है और खर्राटे बढ़ जाते हैं। ऐसे में करवट लेकर सोना अधिक लाभदायक माना जाता है। इसके साथ ही रोज़ाना 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लेना जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से गले की मांसपेशियां ढीली पड़ सकती हैं, जिससे खर्राटों की समस्या और बढ़ जाती है।
तकिये और साफ-सफाई की भूमिका
तकिये की साफ-सफाई भी खर्राटों को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। गंदे तकियों में धूल, बैक्टीरिया और मृत त्वचा कोशिकाएं जमा हो जाती हैं, जो एलर्जी और नाक बंद होने का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर दो सप्ताह में तकिये के कवर को धोया जाए और तकिये को धूप में सुखाया जाए। सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखने से सांस लेने में आसानी होती है और खर्राटों की समस्या कम हो सकती है।
नेचुरल तरीकों से नियंत्रण संभव
हालांकि बाजार में खर्राटे कम करने के लिए कई दवाएं और उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि जीवनशैली में सुधार और नेचुरल उपायों से भी इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी बनाना और सोने से पहले भारी भोजन से बचना भी फायदेमंद साबित होता है। यदि इसके बावजूद समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
डिस्क्लेमर:- यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है अधिक जानकारी के लिए हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क करें।