इंडो-नेपाल सीमा पर फेस और आईडी स्कैनर से कड़ी निगरानी, संदिग्धों की घुसपैठ पर रोक
भारत-नेपाल सीमा से संदिग्ध गतिविधियों और अवैध घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। इसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इंडो-नेपाल बॉर्डर पर फेस और आईडी स्कैनर लगाए गए हैं। अब भारत में प्रवेश करने या नेपाल जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान और चेहरे की स्कैनिंग करानी होगी। इसके बिना किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही सीमा से आने-जाने वाले सभी वाहनों का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
रूपईडीहा चेक पोस्ट पर हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित भारत-नेपाल सीमा के रूपईडीहा चेक पोस्ट पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। यहां अत्याधुनिक कैमरों से लैस फेस और आईडी स्कैनर स्थापित किए गए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति चेक पोस्ट पर पहुंचता है, उसका पहचान पत्र और चेहरा स्कैन किया जाता है। सिस्टम द्वारा दोनों का मिलान होने के बाद ही भारत में प्रवेश या नेपाल जाने की अनुमति दी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति इस प्रक्रिया को दरकिनार कर सीमा पार करने की कोशिश करेगा तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाएगा।
खुली सीमा के चलते बढ़ी थी घुसपैठ की चुनौती
इंडो-नेपाल सीमा के इस क्षेत्र में करीब 125 किलोमीटर तक खुली सीमा है, जिसका फायदा उठाकर कई बार घुसपैठिए भारत में प्रवेश करने की कोशिश करते रहे हैं। पड़ोसी देश नेपाल के रास्ते पाकिस्तान और अन्य देशों के नागरिक बिना वीजा के भारत में दाखिल होने का प्रयास कर चुके हैं। ऐसे कई मामलों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने सतर्कता दिखाते हुए घुसपैठियों को पकड़ा और उन्हें जेल भेजा है। बावजूद इसके, सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
एसएसबी कमांडेंट ने पायलट प्रोजेक्ट की जानकारी दी
एसएसबी की 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने बताया कि फोर्स हेडक्वार्टर की ओर से यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत आने-जाने वाले हर व्यक्ति का डेटा रिकॉर्ड किया जा रहा है और फेस रीडिंग तकनीक के जरिए पहचान सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से यह पता चल सकेगा कि कौन व्यक्ति कब और कहां से सीमा पार कर रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
एंटी-नेशनल गतिविधियों पर लगेगा प्रभावी नियंत्रण
कमांडेंट उदावत के अनुसार, आने वाले समय में यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश या चीन जैसे तीसरे देशों से जुड़े किसी भी एंटी-नेशनल तत्व की घुसपैठ की कोशिश होती है तो उसे पकड़ना काफी आसान होगा। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद सीमा पर और अधिक कैमरे और आधुनिक सिस्टम लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था पूरी तरह सुचारू हो जाएगी।
सीमावर्ती लोगों और देश की सुरक्षा को मिलेगा लाभ
एसएसबी अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि सीमावर्ती जिलों में रहने वाले आम लोगों को भी सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। आने वाले दिनों में यह तकनीक सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।