पुश्तैनी सोना बेचने से पहले बरतें सावधानी, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
भारत में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि पीढ़ियों की मेहनत और बचत का प्रतीक माना जाता है। ज्यादातर घरों में पुश्तैनी सोना वर्षों तक संभालकर रखा जाता है, जो जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहारा बनता है। शादी, बीमारी या किसी बड़ी जरूरत के समय लोग पुराने गहने बेचने का फैसला लेते हैं। लेकिन यही वह समय होता है, जब थोड़ी सी लापरवाही आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर तब जब सोना बिना हॉलमार्क का हो।
पुराने सोने की शुद्धता क्यों बनती है बड़ा सवाल
पुराने समय में हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं थी, इसलिए अधिकतर पुश्तैनी गहनों पर हॉलमार्क नहीं होता। ऐसे में जब आप सोना बेचने जाते हैं, तो उसकी शुद्धता पूरी तरह ज्वैलर की जांच और उसके बताए कैरेट पर निर्भर हो जाती है। कई मामलों में 22 कैरेट के सोने को 20 या 18 कैरेट बताकर कम कीमत दी जाती है। क्योंकि सोने का भाव सीधे कैरेट से जुड़ा होता है, इसलिए कैरेट कम होने का मतलब सीधा नुकसान होता है।
बिना हॉलमार्क वाला सोना क्यों है जोखिम भरा
बिना हॉलमार्क वाले सोने की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसकी शुद्धता साबित करने का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं होता। ज्वैलर अपनी जांच के आधार पर कैरेट तय करता है और ग्राहक को उसी पर भरोसा करना पड़ता है। ऐसे में अगर सोना कम कैरेट का बताकर तौला गया, तो ग्राहक के पास नुकसान के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं होता। यही वजह है कि बिना जांच के सोना बेचना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
सोना बेचने से पहले करें यह जरूरी काम
अगर आप अपने पुराने या पुश्तैनी सोने को बेचने का मन बना रहे हैं, तो सबसे पहले उसकी BIS हॉलमार्किंग जरूर करवा लें। हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता की सरकारी गारंटी होती है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि आपका सोना कितने कैरेट का है और ज्वैलर आपको गुमराह नहीं कर सकता। थोड़ी सी समझदारी आपको हजारों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
हॉलमार्किंग क्या है और क्यों जरूरी है
देश में सोने की शुद्धता की जांच और प्रमाणन का काम Bureau of Indian Standards यानी BIS करता है। 1 अप्रैल 2023 से सरकार ने सोने की खरीद-बिक्री के लिए 6 अंकों वाला HUID नंबर अनिवार्य कर दिया है। हॉलमार्क वाली ज्वैलरी पर BIS का तिकोना निशान, कैरेट की जानकारी और यूनिक HUID नंबर दर्ज होता है। यह चिन्ह इस बात की गारंटी देता है कि सोना तय मानकों के अनुसार शुद्ध है।
पुराने गहनों की हॉलमार्किंग कैसे कराएं
पुराने गहनों की हॉलमार्किंग कराना अब आसान प्रक्रिया बन चुकी है। इसके लिए सबसे पहले BIS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने शहर में मौजूद BIS अप्रूव्ड हॉलमार्किंग सेंटर की जानकारी लेनी होती है। वहां विशेष मशीन से सोने की जांच की जाती है, जो अलग-अलग लेयर में सोने की शुद्धता मापती है। जांच पूरी होने के बाद गहनों पर BIS हॉलमार्क लगा दिया जाता है और कैरेट वैल्यू आधिकारिक रूप से तय हो जाती है।
हॉलमार्किंग पर कितना खर्च आता है
हॉलमार्किंग की प्रक्रिया बहुत महंगी नहीं होती। आमतौर पर सोने की टेस्टिंग फीस करीब 200 रुपये होती है, जबकि प्रति गहना हॉलमार्किंग चार्ज लगभग 45 रुपये लिया जाता है। इतना छोटा सा खर्च आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकता है।
कैरेट से कैसे पहचानें सोने की शुद्धता
सोने पर लिखे नंबर उसकी शुद्धता बताते हैं। 22 कैरेट सोने पर 916 लिखा होता है, जिसका मतलब 91.66 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। 18 कैरेट पर 750 अंकित होता है, यानी 75 प्रतिशत शुद्धता। इसी तरह 14 कैरेट पर 585 लिखा होता है। बाकी हिस्से में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, ताकि गहनों को मजबूती मिल सके।
नई ज्वैलरी खरीदते वक्त भी रहें सतर्क
सिर्फ बेचते समय ही नहीं, बल्कि नई ज्वैलरी खरीदते वक्त भी सावधानी जरूरी है। BIS हॉलमार्क जरूर जांचें, कैरेट वैल्यू समझें और स्टोन वाली ज्वैलरी में सोने व स्टोन का वजन अलग-अलग तौलवाएं। बिल में सभी चीजों का रेट अलग-अलग लिखवाना भी जरूरी है।