News Image

देश के टॉप-50 प्रदूषित शहरों में राजस्थान के 18 शहर, हवा की गुणवत्ता पर गंभीर संकट

भारत में वायु प्रदूषण की समस्या अब केवल दिल्ली या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह देश के कई राज्यों में गंभीर रूप ले चुकी है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट ने इस संकट की भयावहता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के उन शीर्ष 50 शहरों में जहां PM10 का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया, उनमें राजस्थान के सबसे ज्यादा 18 शहर शामिल हैं। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश के 10 और मध्य प्रदेश के 5 शहरों से भी अधिक है, जो राजस्थान में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

भिवाड़ी बना देश का सातवां सबसे प्रदूषित शहर

राजस्थान का औद्योगिक केंद्र भिवाड़ी अब देश का सातवां सबसे प्रदूषित शहर बन चुका है। यहां हवा की गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। भिवाड़ी में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनसे निकलने वाला धुआं और प्रदूषक तत्व वातावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा, अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां और भारी वाहनों की आवाजाही ने भी प्रदूषण की समस्या को और गहरा कर दिया है।

158 शहर राष्ट्रीय मानकों पर विफल

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि राजस्थान के 158 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) पर खरे नहीं उतर पाए हैं। यह स्थिति किसी एक साल या मौसम विशेष की नहीं है। वर्ष 2019 से 2024 तक के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि इन शहरों में प्रदूषण के स्रोत लंबे समय से सक्रिय हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, खुले में कचरा जलाना और निर्माण कार्यों की अनदेखी ने हवा को लगातार जहरीला बनाए रखा है।

प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर फंड का असंतुलित उपयोग

रिपोर्ट में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत मिले फंड के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। विश्लेषण के मुताबिक, कुल बजट का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा केवल सड़कों की धूल प्रबंधन पर खर्च कर दिया गया। इसके विपरीत, उद्योगों से होने वाले प्रदूषण, घरेलू ईंधन से निकलने वाले धुएं और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे मुख्य कारणों पर एक प्रतिशत से भी कम राशि खर्च की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़कों पर पानी छिड़कने या सफाई करने से प्रदूषण की जड़ पर प्रहार नहीं होता।

NCAP से बाहर रह गए अधिकांश प्रदूषित शहर

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि राजस्थान के जिन 158 शहरों की हवा मानकों पर फेल रही है, उनमें से बहुत कम शहर ही केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रम NCAP के दायरे में आते हैं। इसका अर्थ यह है कि बड़ी संख्या में लोग ऐसे शहरों में रह रहे हैं, जहां वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई ठोस और विशेष सरकारी तंत्र मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों पर सख्त कानून, आधुनिक तकनीक और प्रभावी निगरानी लागू नहीं की जाएगी, तब तक हालात सुधरना मुश्किल है।