डायबिटीज के मरीजों में आंखों की रोशनी जाने का बढ़ता खतरा, समय पर जांच से बचाव संभव
डायबिटीज (मधुमेह) केवल एक सामान्य बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में आंखों की रोशनी जाने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है, जो बिना दर्द और शुरुआती लक्षणों के धीरे-धीरे दृष्टि को नुकसान पहुंचाती है।
लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल आंखों की रेटिना की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देता है। इसके कारण आंखों में सूजन, खून या तरल पदार्थ का रिसाव, धुंधला दिखना, काले धब्बे नजर आना और अचानक दृष्टि कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, 10–15 वर्षों से डायबिटीज से पीड़ित मरीज, जिनका HbA1c स्तर लगातार अधिक रहता है, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज तथा गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज से ग्रसित महिलाओं में इसका जोखिम अधिक होता है।
यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी स्थायी अंधेपन, रेटिना डिटैचमेंट और काले मोतियाबिंद जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकती है। बाद के चरणों में महंगे इंजेक्शन या लेजर सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि डायबिटीज के मरीज साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच अवश्य कराएं और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें। समय पर जांच और सही देखभाल से डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव संभव है।
नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।