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21 जनवरी तक अटकी ‘जन नायकन’ की रिलीज, CBFC की अपील पर मद्रास हाईकोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक

 

चेन्नई |
अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज एक बार फिर कानूनी अड़चन में फंस गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की अपील पर सिंगल जज के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें बोर्ड को फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी, पोंगल अवकाश के बाद तय की गई है। ऐसे में फिल्म की रिलीज फिलहाल टल गई है।

शुक्रवार सुबह मद्रास हाईकोर्ट के सिंगल जज ने फिल्ममेकर्स द्वारा सुझाए गए बदलावों के बाद UA सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था और शिकायतों पर विचार करने के तरीके को लेकर CBFC को फटकार भी लगाई थी। हालांकि, उसी आदेश के खिलाफ CBFC ने अपील दायर कर अर्जेंट सुनवाई की मांग की, जिस पर देर शाम डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी।

सुनवाई के दौरान CBFC की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ए.आर. एल. सुंदरेशन ने तर्क दिया कि बोर्ड को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर नहीं दिया गया और प्रोडक्शन हाउस की याचिका में रिवाइजिंग कमेटी को भेजने के फैसले को चुनौती नहीं दी गई थी, फिर भी उसे रद्द कर दिया गया। वहीं, फिल्म के प्रोड्यूसर्स की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा।

चीफ जस्टिस ने यह सवाल भी उठाया कि बिना काउंटर एफिडेविट के सिंगल जज द्वारा ऐसा आदेश कैसे दिया जा सकता है और इस बात पर चिंता जताई कि सर्टिफिकेशन के लिए कोर्ट पर दबाव बनाया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोड्यूसर्स को रिलीज डेट घोषित करने से पहले सर्टिफिकेट का इंतजार करना चाहिए था।

इससे पहले, सिंगल जज के आदेश के बाद TVK के स्टेट लीगल विंग की जॉइंट कोऑर्डिनेटर इंद्रा धनराज ने कहा था कि सर्टिफिकेशन में देरी से फिल्म को नुकसान होता है और यदि समय पर रिलीज नहीं हो पाती तो मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म के 27 सीन काटे गए हैं।

फिलहाल, ‘जन नायकन’ की टीम और उनके कानूनी सलाहकार आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी शामिल है।