चीन-जापान संबंधों में बढ़ता तनाव, निर्यात पर नए नियमों से व्यापार प्रभावित
बीजिंग/टोक्यो:
चीन और जापान के बीच पहले से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव में एक बार फिर बढ़ोतरी देखी गई है। चीन द्वारा निर्यात पर लागू किए गए नए नियमों को हटाने की जापान की मांग को खारिज किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक मतभेद और गहरे हो गए हैं। इसका सीधा असर जापान से चीन भेजी जाने वाली कई खेपों पर पड़ा है, जिनमें देरी की खबरें सामने आई हैं।
चीन ने स्पष्ट किया है कि ‘दोहरे इस्तेमाल की वस्तुओं’ पर लगाए गए नए निर्यात नियम पूरी तरह वैध हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में आवश्यक हैं। चीनी राजदूत वू जियांगहाओ ने इन नियमों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप बताया। वहीं, जापान ने कहा है कि इन प्रतिबंधों के कारण कृषि उत्पादों, मछली, साके (जापानी पारंपरिक शराब) और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
इस बीच, चीन ने जापान पर सैन्य ताकत बढ़ाने का आरोप लगाया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने अपने संपादकीय में जापान के “नए सैन्यवाद” की कड़ी आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया।
वर्तमान तनाव की पृष्ठभूमि नवंबर में तब बनी, जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने ताइवान को लेकर बयान दिया था। चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता रहा है।
जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरु किहारा ने स्वीकार किया है कि कुछ जापानी निर्यात चीन में रुके हुए हैं और सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जापान यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा कि निर्यात प्रक्रिया सुचारू बनी रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों पर क्षेत्रीय स्थिरता काफी हद तक निर्भर करेगी।