पतंगों से रंगा आसमान: मकर संक्रांति पर भारत के ये मशहूर पतंग महोत्सव
भारत विविधताओं का देश है, जहां हर त्योहार अपनी अलग पहचान और रंग लिए होता है। मकर संक्रांति भी ऐसा ही एक पर्व है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न-भिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं यह फसल के त्योहार के रूप में मनाया जाता है तो कहीं सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव होता है। लेकिन भारत के कई राज्यों में मकर संक्रांति की पहचान पतंगबाजी से जुड़ी हुई है। इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है और हर छत पर उत्साह, प्रतिस्पर्धा और उल्लास का माहौल दिखाई देता है।
गुजरात में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की धूम
जब भी मकर संक्रांति और पतंगबाजी की बात होती है, तो सबसे पहले गुजरात का नाम सामने आता है। गुजरात में इस पर्व को उत्तरायण कहा जाता है और अहमदाबाद इसका सबसे बड़ा केंद्र है। साबरमती नदी के किनारे आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। यहां न केवल भारत के अलग-अलग राज्यों से, बल्कि जापान, फ्रांस, ब्राजील और अमेरिका जैसे कई देशों से भी पतंगबाज हिस्सा लेने आते हैं। खास डिजाइन की पतंगें, विशाल आकृतियों वाली पतंगें और रंगीन रोशनी से सजा आसमान इस महोत्सव को अद्भुत बना देता है। वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में भी पूरे हफ्ते पतंगबाजी का उत्साह देखने को मिलता है।
राजस्थान में सकरात का शाही रंग
राजस्थान में मकर संक्रांति को सकरात के नाम से जाना जाता है और यहां इसे एक शाही अंदाज में मनाया जाता है। जयपुर में हवा महल, आमेर और शहर की पुरानी हवेलियों की छतों से उड़ती पतंगें शहर को किसी चित्रकला जैसा रूप दे देती हैं। वहीं जोधपुर में मेहरानगढ़ किले की पृष्ठभूमि में पतंगबाजी का दृश्य पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक होता है। जोधपुर के रेगिस्तानी इलाकों में इस दिन ऊंटों और घोड़ों की शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें लोक कलाकार, नर्तक और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज माहौल को जीवंत बना देती है। पूरे शहर में लोक संगीत और पारंपरिक गीतों की मिठास घुली रहती है।
मध्य प्रदेश में छतों से गूंजता उत्साह
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भी मकर संक्रांति का उत्साह देखते ही बनता है। यहां पतंगबाजी केवल एक खेल नहीं, बल्कि सामूहिक आनंद का अवसर होती है। सुबह से ही लोग छतों पर इकट्ठा हो जाते हैं और ‘काई पो चे’ की आवाजें गूंजने लगती हैं। परिवार, दोस्त और पड़ोसी एक साथ सर्दियों की धूप में पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं। घर-घर में तिल और गुड़ से बने लड्डुओं की खुशबू फैल जाती है, जो इस पर्व की मिठास को और बढ़ा देती है। इंदौर में यह त्योहार सामाजिक मेलजोल और आपसी खुशी का प्रतीक बन जाता है।
पतंगबाजी: सिर्फ खेल नहीं, संस्कृति का उत्सव
मकर संक्रांति पर होने वाली पतंगबाजी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। यह त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक साथ छतों पर नजर आते हैं। पतंगों के साथ प्रतिस्पर्धा जरूर होती है, लेकिन इसके पीछे खुशी और उत्साह की भावना छिपी होती है। तिल, गुड़ और पारंपरिक व्यंजनों के साथ यह पर्व भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाता है।
आसमान में उड़ती खुशियों की पतंगें
मकर संक्रांति के दिन जब भारत के अलग-अलग शहरों में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, तो यह दृश्य केवल आंखों को नहीं, बल्कि दिल को भी सुकून देता है। गुजरात की अंतरराष्ट्रीय पहचान, राजस्थान का शाही अंदाज और मध्य प्रदेश का पारिवारिक उत्साह, सभी मिलकर इस पर्व को खास बना देते हैं। यही वजह है कि मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का यह महाउत्सव हर साल लोगों के दिलों में नई उमंग और नई ऊर्जा भर देता है।