बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का भव्य आगाज़, ‘रौबिलो’ का जलवा देख झूमे देशी-विदेशी पर्यटक
रेगिस्तान की धरती बीकानेर एक बार फिर लोक संस्कृति, परंपरा और रंगों के उत्सव में डूब गई है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का शुभारंभ ऐतिहासिक लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से रामपुरिया हवेली तक आयोजित हेरिटेज वॉक के साथ हुआ। लोक संगीत की थाप, सजे-धजे ऊंटों की शान और बीकानेरी मेहमाननवाज़ी के बीच शुरू हुआ यह तीन दिवसीय उत्सव देशी-विदेशी पर्यटकों को बीकानेर की आत्मा से जोड़ने का माध्यम बनेगा। खास बात यह रही कि केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल स्वयं इस हेरिटेज वॉक में पैदल शामिल हुए और शहर की सांस्कृतिक विरासत को नजदीक से महसूस किया।
हेरिटेज वॉक में दिखी बीकानेर की शान
हेरिटेज वॉक के दौरान बीकानेर की ऐतिहासिक इमारतें, हवेलियां और परंपरागत जीवनशैली जीवंत नजर आई। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया। सजे-धजे ऊंटों के साथ चलता यह काफिला शहर की गलियों से गुजरते हुए पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती यह वॉक उत्सव की एक शानदार शुरुआत साबित हुई।
‘रौबिलो’ बने विदेशी पर्यटकों का आकर्षण
इस हेरिटेज वॉक में ऊंटों के साथ-साथ ‘रौबिलो’ भी खास आकर्षण रहे। चेहरे पर रौबदार मूंछें और दाढ़ी, पारंपरिक अंदाज और शाही ठाठ के साथ चलते रौबिलों ने विदेशी पर्यटकों का दिल जीत लिया। विदेशी सैलानी उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते और बीकानेरी संस्कृति को नजदीक से समझते नजर आए। वहीं, पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सजी महिलाएं भी वॉक का हिस्सा बनीं, जिनकी रंग-बिरंगी पोशाकें विदेशी पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही थीं।
बीकानेरी स्वाद से रूबरू कराएगा फूड फेस्टिवल
जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने बताया कि ऊंट उत्सव के दौरान बीकानेरी खानपान को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। भुजिया, घेवर और जलेबी जैसे प्रसिद्ध व्यंजनों का लाइव प्रदर्शन कर पर्यटकों को बीकानेरी स्वाद से परिचित कराया जाएगा। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ के अनुसार हेरिटेज वॉक के बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक जिला उद्योग संघ कार्यालय में मान-मनुहार कार्यक्रम के तहत ट्रेडिशनल बीकानेरी फूड फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।
धरणीधर मैदान में पहली बार नई प्रतियोगिताएं
धरणीधर मैदान में इस बार उत्सव के तहत कई नई प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। यहां पहली बार मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण और ढोला-मारू प्रतियोगिताएं होंगी। दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक प्राउड एंड प्राइड ऑफ बीकानेर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शाम 7 से रात 10 बजे तक बीकाणा री आवाज कार्यक्रम के अंतर्गत लोकल ग्रुप म्यूजिकल बैंड प्रतियोगिता होगी, जिसमें विजेता टीम को अगले दिन डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में प्रस्तुति देने का मौका मिलेगा।
दूसरे दिन योग और ऊंट संस्कृति का संगम
10 जनवरी को सुबह संसोलाव तालाब के किनारे ‘करें योग, रहें निरोग’ कार्यक्रम के तहत फ्लो योग अभ्यास कराया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में ऊंटां री बातां कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें ऊंट नृत्य, फर कटिंग, साज-सज्जा, ऊंट दौड़ और घुड़दौड़ जैसी पारंपरिक गतिविधियां होंगी। इसी दिन डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में ऊंटों के इतिहास और विरासत पर आधारित कला प्रदर्शनी भी लगेगी। शाम को बेस्ट ऑफ राजस्थान फोक नाइट का आयोजन होगा।
रायसर के धोरों में उत्सव का रोमांचक समापन
11 जनवरी को उत्सव का अंतिम दिन रायसर के धोरों में आयोजित होगा। यहां ग्रामीण खेलों के साथ एडवेंचर एक्टिविटी, डेजर्ट एक्सपीरियंस, सैंड आर्ट प्रदर्शनी, हैंडीक्राफ्ट और फूड बाजार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे। शाम को रंगीलो राजस्थान कार्यक्रम और जसनाथी संप्रदाय की अग्नि नृत्य प्रस्तुति के साथ अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का भव्य समापन किया जाएगा।
योग को जोड़ना इस बार का विशेष नवाचार
इस बार ऊंट उत्सव में पहली बार योग को शामिल किया गया है। संसोलाव तालाब के पास पीपल वाटिका में आयोजित योग सत्र के जरिए पर्यटकों को न केवल योग का महत्व बताया जाएगा, बल्कि बीकानेर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित कराया जाएगा। यह नवाचार उत्सव को एक नई पहचान देने का प्रयास माना जा रहा है।