News Image

145 मौतों के बाद सख्त हुए स्लीपर बसों के नियम, अब केवल फैक्ट्री-सर्टिफाइड बसों को ही मिलेगी अनुमति

देश में स्लीपर कोच बसों में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं और पिछले छह महीनों में 145 लोगों की दर्दनाक मौतों के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्लीपर बसों के निर्माण और मॉडिफिकेशन से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव की घोषणा की है। अब देश में स्लीपर बसों का निर्माण न तो कस्टम-मेड तरीके से होगा और न ही छोटी वर्कशॉप में। भविष्य में केवल मान्यता प्राप्त कारखानों और वाहन निर्माता कंपनियों को ही स्लीपर बस बनाने की अनुमति होगी।

क्यों जरूरी हुआ नियमों में बदलाव

सरकारी जांच और विभिन्न हादसों की रिपोर्ट में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि अधिकतर बस अग्निकांड ‘जुगाड़’ तकनीक और अवैध मॉडिफिकेशन का नतीजा हैं। बसों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर उन्हें नियमों के खिलाफ बदला गया, जिससे ओवरलोडिंग, खराब वायरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई। यही कारण है कि मामूली तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे में बदल गई। मंत्रालय के अनुसार, यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तो यात्रियों की जान लगातार खतरे में बनी रहती।

जैसलमेर हादसा बना टर्निंग पॉइंट

राजस्थान के जैसलमेर में 14 अक्टूबर को हुआ बस अग्निकांड इस पूरे मामले में सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि बस का पंजीकरण ‘नॉन-एसी’ के रूप में हुआ था, लेकिन बस मालिक ने नियमों को ताक पर रखकर उसे एसी बस में बदल दिया था। अवैध वायरिंग और अतिरिक्त लोड के कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और महज 14 दिन पुरानी बस पूरी तरह जलकर राख हो गई। इस घटना ने सरकार को झकझोर कर रख दिया।

नई स्लीपर बसों के लिए अनिवार्य तकनीकी मानक

नए नियमों के तहत अब हर स्लीपर बस में आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, जिससे आग लगते ही समय पर चेतावनी मिल सके। इसके साथ ही ड्राइवर की नींद या अत्यधिक थकान की स्थिति को पहचानने वाला एआई आधारित सेंसर भी जरूरी किया गया है। प्रत्येक कोच में आपात स्थिति के लिए हथौड़ा, इमरजेंसी लाइट और स्पष्ट रूप से चिन्हित निकास द्वार होना भी अनिवार्य होगा। इन सभी मानकों का उद्देश्य हादसे की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

अधिकारियों की जवाबदेही भी तय

जैसलमेर हादसे के बाद एसीबी की जांच में प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत भी सामने आई। नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के आरोप में चित्तौड़गढ़ के डीटीओ सुरेंद्र सिंह गहलोत और एक सहायक प्रशासनिक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। नितिन गडकरी ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर ऐसे सभी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने बस बॉडी बिल्डरों को ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ की छूट दी थी।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा

अब तक छोटी वर्कशॉप में बनी बसों में अक्सर अग्नि-रोधी सामग्री और सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती थी। नए नियम लागू होने के बाद केवल प्रमाणित और नियंत्रित कारखानों में ही बस बॉडी का निर्माण होगा, जिससे तकनीकी खामियों की गुंजाइश काफी हद तक खत्म हो जाएगी। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और मानक-आधारित यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।