नागौरी अश्वगंधा को मिला जीआई टैग, किसानों के लिए खुला खुशहाली का नया अध्याय
राजस्थान के नागौर जिले के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। केंद्र सरकार ने उत्कृष्ट औषधीय गुणों और विशिष्ट पहचान वाली ‘नागौरी अश्वगंधा’ को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्रदान किया है। इस मान्यता के साथ नागौर न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए कृषि ब्रांड के रूप में उभरा है। यह उपलब्धि मारवाड़ क्षेत्र के किसानों के लिए गर्व का विषय है और इससे औषधीय खेती को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शुद्धता और गुणवत्ता पर लगी सरकारी मुहर
नागौर कृषि महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विकास पावड़िया के अनुसार, जीआई टैग मिलना नागौरी अश्वगंधा की शुद्धता, गुणवत्ता और विशिष्टता पर केंद्र सरकार की अंतिम मुहर है। उन्होंने कहा कि इस टैग से न केवल उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे युवाओं का रुझान औषधीय फसलों की खेती की ओर बढ़ेगा और पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प खुलेंगे।
नागौर की जलवायु ने बनाया अश्वगंधा को खास
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नागौर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी अश्वगंधा की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है। यही कारण है कि यहां उगाई जाने वाली अश्वगंधा की जड़ें अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक पुष्ट, लंबी और औषधीय तत्वों, विशेषकर एल्कलॉइड्स से भरपूर होती हैं। इसके फल यानी बेरी का गहरा चमकीला लाल रंग इसकी उच्च गुणवत्ता का स्पष्ट प्रमाण माना जाता है। इन्हीं विशिष्ट गुणों के आधार पर ‘नागौरी अश्वगंधा’ को जीआई टैग प्रदान किया गया है।
किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि की नई उम्मीद
जीआई टैग मिलने के बाद नागौर जिले के हजारों किसानों के लिए आर्थिक खुशहाली के नए रास्ते खुलने की संभावना है। अब ‘नागौरी अश्वगंधा’ नाम का दुरुपयोग कोई अन्य व्यक्ति या संस्था नहीं कर सकेगी। इससे मिलावट पर प्रभावी रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य मिलेगा। बिचौलियों की भूमिका सीमित होने से किसान सीधे खरीदारों से जुड़ सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दवा और आयुर्वेदिक कंपनियां अब सीधे किसानों से संपर्क करेंगी, जिससे निर्यात में बढ़ोतरी होगी और दामों में भी सुधार आएगा।
रोजगार और प्रोसेसिंग यूनिट्स को मिलेगा बढ़ावा
इस उपलब्धि से क्षेत्र में अश्वगंधा आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। औषधीय खेती के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जीआई टैग के पीछे इनका रहा अहम योगदान
नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग दिलाने में नागौरी वेलफेयर सोसाइटी की निदेशक पार्वती चौधरी की भूमिका अहम रही है। उन्होंने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए जीआई टैग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके साथ ही आईसीएआर आनंद, गुजरात के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. परमेश्वरलाल सारण और राज्य कृषि विभाग ने तकनीकी सहयोग और आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराकर इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजस्थान का 22वां जीआई प्रमाणित उत्पाद
नागौरी अश्वगंधा के जीआई सूची में शामिल होने के साथ ही राजस्थान के जीआई प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे पहले बीकानेरी भुजिया, मकराना मार्बल और कोटा डोरिया जैसे उत्पाद पहले ही इस सूची में शामिल हैं। यह उपलब्धि न केवल नागौर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है और राज्य की कृषि पहचान को नई मजबूती प्रदान करती है।