मोबाइल की बढ़ती लत से सेहत को खतरा, कमर-गर्दन से लेकर आंखों और दिमाग तक पड़ रहा असर
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल स्क्रीन देखना और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया या इंटरनेट पर समय बिताना अब आम आदत बन गई है। तकनीक ने जहां लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया है, वहीं इसका अत्यधिक उपयोग हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरा भी बनता जा रहा है। लगातार और लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से न केवल आंखों पर असर पड़ता है, बल्कि शरीर के कई अहम अंग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
शरीर के किन हिस्सों पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल कमर दर्द, गर्दन और कंधों में अकड़न, रीढ़ की हड्डी की समस्याएं और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसे मेडिकल भाषा में “टेक नेक” या “स्मार्टफोन सिंड्रोम” कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक झुककर मोबाइल देखता है, तो उसकी रीढ़ की हड्डी पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। इस अतिरिक्त दबाव के कारण मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और समय के साथ हड्डियों की मजबूती भी प्रभावित हो सकती है।
झुककर मोबाइल देखने से क्यों बढ़ता है खतरा
मोबाइल फोन को झुककर देखने की आदत आज लगभग हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। सामान्य स्थिति में सिर का वजन लगभग पांच किलो होता है, लेकिन जब सिर को आगे की ओर झुकाया जाता है तो यह वजन रीढ़ की हड्डी पर कई गुना बढ़ जाता है। लगातार इसी गलत मुद्रा में बैठने या लेटने से गर्दन, कंधों और कमर की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। यही वजह है कि आज कम उम्र में ही लोग गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत करने लगे हैं।
स्पॉन्डिलाइटिस का बढ़ता खतरा
स्पॉन्डिलाइटिस एक गंभीर समस्या है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में सूजन आ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन का लंबे समय तक गलत तरीके से इस्तेमाल इस बीमारी के खतरे को बढ़ा देता है। खासकर युवा और किशोर वर्ग में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। घंटों तक मोबाइल पर गेम खेलना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया पर समय बिताना और इस दौरान सही पोश्चर न रखना धीरे-धीरे मांसपेशियों और जोड़ों को कमजोर बना देता है। समय रहते ध्यान न देने पर यह दर्द स्थायी रूप भी ले सकता है।
आंखों पर पड़ने वाला प्रभाव भी कम खतरनाक नहीं
मोबाइल फोन का असर केवल कमर और गर्दन तक सीमित नहीं है, बल्कि आंखों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की रेटिना पर असर डाल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन, पानी आना, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। लगातार आंखों पर दबाव पड़ने से आंखों की रोशनी कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर
मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी इससे प्रभावित होता है। लगातार नोटिफिकेशन चेक करना, सोशल मीडिया पर दूसरों से खुद की तुलना करना और ऑनलाइन दुनिया में सक्रिय रहने की आदत तनाव और चिंता को बढ़ा सकती है। देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे शरीर की रिकवरी प्रभावित होती है और व्यक्ति दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करता है।
विशेषज्ञ क्या देते हैं सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल का इस्तेमाल सीमित समय के लिए करना चाहिए। मोबाइल स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना जरूरी है, ताकि गर्दन पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की स्ट्रेचिंग करना मांसपेशियों को राहत देता है। सही मुद्रा में बैठना बेहद जरूरी है, जिसमें पीठ सीधी और कंधे ढीले होने चाहिए। आंखों की सुरक्षा के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल भी फायदेमंद हो सकता है।
संतुलित उपयोग से ही रहेगी सेहत सुरक्षित
मोबाइल फोन आधुनिक जीवन की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका संतुलित और सही तरीके से इस्तेमाल ही हमें स्वस्थ रख सकता है। यदि समय रहते सावधानी न बरती गई, तो छोटी सी आदत भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम तकनीक का उपयोग करें, लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।