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रणथंभौर में बाघों के बेहद नजदीक जाना पड़ेगा भारी, टूरिस्ट वाहन मालिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को देखते हुए वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। टाइगर सफारी के दौरान नियमों की अनदेखी और बाघों के बेहद नजदीक तक पर्यटक वाहनों को ले जाने की घटनाओं को रोकने के लिए अब नया फैसला लिया गया है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में चलने वाली जिप्सी और कैंटर सहित सभी पर्यटक वाहनों में उच्च गुणवत्ता वाले डैश कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में उप वन संरक्षक (पर्यटन) संजीव शर्मा ने औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

सभी सफारी वाहनों में डैश कैमरा अनिवार्य

जारी आदेश के अनुसार रणथंभौर में संचालित सभी टूरिस्ट वाहनों के मालिकों को अपने सफारी वाहनों में जल्द से जल्द डैश कैमरे लगवाने होंगे। कैमरे लगने के बाद इसकी सूचना वन विभाग के कार्यालय को देना भी अनिवार्य किया गया है। वन प्रशासन का मानना है कि डैश कैमरों की मदद से सफारी के दौरान होने वाली गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा सकेगी और नियमों के उल्लंघन पर ठोस सबूत के आधार पर कार्रवाई संभव होगी। इससे न केवल बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पर्यटकों की जान को भी खतरे से बचाया जा सकेगा।

टाइगर के नजदीक वाहन ले जाना बन रहा चिंता का विषय

वन विभाग के अनुसार सफारी के दौरान वाहन चालकों को बाघों से एक निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद कई बार यह देखने में आया है कि कुछ चालक रोमांच या पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अपने वाहन बाघों के बेहद नजदीक तक ले जाते हैं। इस तरह की लापरवाही न केवल वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह बाघों के व्यवहार को भी प्रभावित कर सकती है। इससे किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।

डैश कैमरे से लगेगी अनियमितताओं पर लगाम

वन अधिकारियों का कहना है कि डैश कैमरे लगने के बाद सफारी के दौरान हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी। यदि कोई वाहन चालक तय दूरी का उल्लंघन करता है, निर्धारित मार्ग से बाहर जाता है या अन्य किसी नियम की अनदेखी करता है, तो डैश कैमरे की रिकॉर्डिंग के आधार पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। इससे वाहन चालकों में नियमों के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी और मनमानी पर अंकुश लगेगा।

पहले भी लगाए जा चुके हैं जीपीएस सिस्टम

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब रणथंभौर में सफारी वाहनों की निगरानी को लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं। इससे पहले वन विभाग ने सभी पर्यटक वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवाना अनिवार्य किया था। जीपीएस के जरिए वाहनों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जाती है, ताकि कोई भी वाहन तय रूट से बाहर न जा सके। अब डैश कैमरे के जरिए दृश्य प्रमाण भी उपलब्ध होंगे, जिससे निगरानी व्यवस्था और मजबूत हो जाएगी।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और वाहन मालिकों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। डैश कैमरे की रिकॉर्डिंग को साक्ष्य मानते हुए उनके खिलाफ जुर्माना, सफारी परमिट रद्द करने या अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य रणथंभौर में वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यटकों की सुरक्षित सफारी और अभयारण्य की गरिमा को बनाए रखना है।

संरक्षण और सुरक्षा के लिए सख्ती जरूरी

रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है और यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। वन विभाग का मानना है कि डैश कैमरे जैसे कदम भविष्य में रणथंभौर में सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देंगे और बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होंगे।