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भीषण ठंड में सेहत का रखें खास ख्याल, छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी बीमारी की वजह

इन दिनों ठंड का मौसम अपने चरम पर है और देश के कई हिस्सों में कड़ाके की सर्दी के साथ शीत लहर का असर साफ दिखाई दे रहा है। गिरते तापमान ने जहां जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी, जोड़ों के दर्द और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इस भीषण ठंड के मौसम में किन सावधानियों को अपनाकर खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है, ताकि सर्दियों का आनंद बीमारी के डर के बिना लिया जा सके।

 

ठंड का शरीर पर गहरा असर, अंदरूनी सिस्टम पर बढ़ता दबाव

अक्सर लोग ठंड को केवल बाहरी समस्या मानते हैं और सोचते हैं कि मोटे कपड़े पहन लेने से ठंड का असर खत्म हो जाएगा, लेकिन सच्चाई यह है कि ठंड का प्रभाव शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। जब अत्यधिक ठंड में शरीर का तापमान सामान्य से नीचे जाने लगता है, तो रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे हृदय को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक खून पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि सर्दियों में हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।

 

सर्दियों में स्वस्थ रहने का सही तरीका

सर्दियों में स्वस्थ रहने का मतलब केवल भारी जैकेट पहनना नहीं होता। इसके लिए शरीर के तापमान को संतुलित रखना, सही पोषण लेना और जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करना भी उतना ही आवश्यक है। ठंड के मौसम में इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, इसलिए शरीर को अंदर से मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। सही दिनचर्या अपनाकर न केवल मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि ठंड का पूरा आनंद भी लिया जा सकता है।

 

कान और सिर की सुरक्षा क्यों है सबसे जरूरी

अधिकतर लोग शरीर के बाकी हिस्सों को तो अच्छी तरह ढक लेते हैं, लेकिन कान और सिर को खुला छोड़ देते हैं, जो ठंड में सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। कानों के जरिए ठंडी हवा सीधे नसों को प्रभावित करती है, जिससे सिरदर्द, साइनस और कान में संक्रमण की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर की लगभग 30 प्रतिशत गर्मी सिर के रास्ते बाहर निकल जाती है। ऐसे में ऊनी टोपी, मफलर या शॉल का इस्तेमाल कर सिर और कानों को ढक कर रखना बहुत जरूरी है। अगर इस मौसम में बिना किसी स्पष्ट कारण सिरदर्द महसूस हो, तो यह ठंड लगने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर को गर्म रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

 

हाइड्रेशन और कपड़ों की सही लेयरिंग है जरूरी

सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं होती। ठंड में भी शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए रोजाना 7 से 8 गिलास पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सही रहता है और थकान भी कम महसूस होती है। इसके साथ ही कपड़े पहनने का तरीका भी बेहद महत्वपूर्ण है। एक भारी जैकेट पहनने के बजाय कपड़ों की कई परतें पहनना ज्यादा फायदेमंद होता है। परतों के बीच फंसी हवा शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है और अंदर से गर्माहट बनाए रखती है।

 

काढ़ा और शारीरिक गतिविधियों में संतुलन जरूरी

इम्यूनिटी मजबूत रखने के लिए सर्दियों में दिन में एक बार तुलसी, अदरक और दालचीनी से बने काढ़े का सेवन करना लाभदायक माना जाता है। यह न केवल शरीर को गर्म रखता है, बल्कि श्वसन तंत्र को भी साफ रखने में मदद करता है। हालांकि, इस मौसम में शारीरिक मेहनत करते समय भी सावधानी बरतनी जरूरी है। अत्यधिक ठंड में अचानक भारी वर्कआउट या ज्यादा शारीरिक श्रम करने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंड में धमनियां पहले से ही संकुचित होती हैं। ऐसे में अचानक ज्यादा जोर लगाने से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जो जोखिम भरा साबित हो सकता है।

 

सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव

कड़ाके की ठंड से डरने की बजाय समझदारी और सतर्कता के साथ इसका सामना करना जरूरी है। सही खान-पान, पर्याप्त हाइड्रेशन और खुद को पूरी तरह ढक कर रखने से आप मौसमी बीमारियों से खुद को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। दिनचर्या में थोड़ा सा अनुशासन अपनाकर न केवल स्वास्थ्य बेहतर रखा जा सकता है, बल्कि बार-बार डॉक्टर के पास जाने और दवाओं पर होने वाले खर्च से भी बचा जा सकता है। सर्दियों में आपकी छोटी-छोटी सावधानियां ही आपको स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं।

 

डिस्क्लेमर:- यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है किसी भी तरह की गंभीर समस्या महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क करें।