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राजस्थान में पीएम श्री स्कूलों को लेकर सरकार सख्त, स्कूलों को 'शो केस' मॉडल में विकसित करने की तैयारी

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे में बड़ा सुधार लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ‘पीएम श्री’ योजना को लेकर प्रदेश सरकार अब पूरी तरह सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग को यह संदेश दे दिया गया है कि अब केवल फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित काम स्वीकार नहीं किया जाएगा, बल्कि स्कूलों में वास्तविक बदलाव दिखाई देना चाहिए। इसी क्रम में शिक्षा संकुल में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कर योजना की प्रगति की गहन समीक्षा की।

 

पीएम श्री स्कूलों को बनाया जाएगा ‘शो-केस मॉडल’

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि पीएम श्री स्कूलों को प्रदेश के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाना है। इन स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और भौतिक संसाधनों का ऐसा समन्वय होना चाहिए, जिससे अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि स्कूलों में दिखाई देने वाले बदलाव से किया जाएगा।

 

कलक्टर-एसपी की तर्ज पर अधिकारियों का रात्रि विश्राम

निरीक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने एक नया और सख्त तरीका अपनाया है। अब संयुक्त सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी प्रत्येक जिले में दो-दो पीएम श्री स्कूलों का चयन करेंगे। ये अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संबंधित स्कूल में रात्रि विश्राम भी करेंगे। इस दौरान वे शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों से सीधा संवाद कर शिक्षा की गुणवत्ता, व्यवस्थाओं और जमीनी समस्याओं को समझेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकारियों को 15 कार्य दिवसों की समय सीमा दी गई है।

 

मासिक रैंकिंग से होगी स्कूलों की परफॉर्मेंस की समीक्षा

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि पीएम श्री स्कूलों की मासिक समीक्षा और रैंकिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। स्कूलों में उपलब्ध खाली भूमि, कक्षाओं और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान, मिशन स्टार्ट और मिड-डे मील योजना की भी प्रगति रिपोर्ट ली गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी योजनाएं एक-दूसरे के पूरक के रूप में प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं।

 

8 मार्च तक बालिकाओं के लिए शौचालय अनिवार्य

बैठक में महिला सशक्तीकरण और छात्राओं की सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन पीएम श्री स्कूलों में अभी तक छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है, वहां 8 मार्च महिला दिवस तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा किया जाए। इस डेडलाइन को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

अन्य स्कूलों के लिए प्रेरणा बनेंगे पीएम श्री विद्यालय

मुख्य सचिव ने कहा कि पीएम श्री विद्यालयों को ऐसे आदर्श केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिनका शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन और प्रशासनिक ढांचा प्रदेश के अन्य राजकीय विद्यालयों के लिए मिसाल बने। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की मंशा है कि इन स्कूलों में बदलाव केवल दिखे ही नहीं, बल्कि उसका सकारात्मक असर पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़े।