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कब्ज से राहत के लिए क्या बेहतर—ईसबगोल या चिया सीड्स? सोशल मीडिया बहस के बीच जानिए वैज्ञानिक नजरिया

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चिया सीड्स और ईसबगोल की भूसी को लेकर एक बहस तेज़ हो गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि कब्ज से राहत पाने के लिए कौन-सा विकल्प अधिक प्रभावी है—पारंपरिक भारतीय ईसबगोल या पश्चिमी चलन में आए चिया सीड्स। कब्ज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाली समस्या है, ऐसे में सही प्रकार के फाइबर का चयन बेहद अहम हो जाता है।

ईसबगोल मुख्य रूप से घुलनशील फाइबर का समृद्ध स्रोत है। यह पानी को सोखकर जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे मल नरम और भारी होता है तथा आंतों की सफाई में मदद मिलती है। आयुर्वेद में सदियों से उपयोग किए जा रहे ईसबगोल को क्रॉनिक कब्ज के मामलों में अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इसका सीधा असर पाचन मार्ग को साफ करने पर होता है।

वहीं, चिया सीड्स में घुलनशील और अघुलनशील—दोनों प्रकार के फाइबर पाए जाते हैं। इसके साथ ही इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं। चिया सीड्स न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि वजन प्रबंधन और हृदय स्वास्थ्य में भी सहायक माने जाते हैं। हालांकि, कब्ज से राहत देने में इनका असर ईसबगोल की तुलना में थोड़ा धीमा हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही विकल्पों के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। पानी की कमी होने पर ईसबगोल और चिया सीड्स दोनों ही कब्ज को कम करने के बजाय बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर ईसबगोल को रात में दूध या पानी के साथ, जबकि चिया सीड्स को सुबह स्मूदी या पुडिंग के रूप में लेने की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष:
यदि लक्ष्य केवल क्रॉनिक कब्ज से जल्दी राहत पाना है, तो ईसबगोल की भूसी अधिक सटीक और प्रभावी विकल्प है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति अपने संपूर्ण आहार, पोषण और वजन प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहता है, तो चिया सीड्स बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार इनमें से किसी एक या दोनों का संतुलित सेवन किया जा सकता है।

नोट: यह प्रेस नोट विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और पोषण संबंधी अध्ययनों पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।